उच्च न्यायालय (Articles 214–231) | स्थापना, संरचना, शक्तियाँ और अधिकारिता की विस्तृत व्याख्या

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 के अनुसार उच्च न्यायालय की स्थापना, न्यायाधीशों की नियुक्ति, शक्तियाँ, अधिकारिता, रिट अधिकार, सेवा-शर्तें और प्रशासनिक नियंत्रण की विस्तृत हिंदी व्याख्या। प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण।

Articles 214–231 — उच्च न्यायालय की विस्तृत व्याख्या

उच्च न्यायालय (High Court) भारत की राज्य स्तरीय सर्वोच्च न्यायालय है।
यह संघीय न्यायपालिका का दूसरा स्तर है और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अंतिम अपीलीय अदालत है।

Articles 214 से 231 उच्च न्यायालय की संरचना, नियुक्ति प्रक्रिया, शक्तियों और अधिकारिता को विस्तार से बताते हैं।

आइए सभी अनुच्छेदों को क्रम से समझें।


अनुच्छेद 214 — प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय होगा

यह अनुच्छेद कहता है कि हर राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा।
एक उच्च न्यायालय एक से अधिक राज्यों के लिए भी हो सकता है
(उदाहरण: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय)।


अनुच्छेद 215 — उच्च न्यायालय अवमानना का न्यायालय है

उच्च न्यायालय को अपने सम्मान की रक्षा के लिए अवमानना (Contempt) का दंड देने की शक्ति है।
यह उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।


अनुच्छेद 216 — न्यायाधीशों की संख्या

उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती है।
यह संख्या अदालत के कार्यभार के अनुसार बदल सकती है।


अनुच्छेद 217 — उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की नियुक्ति

नियुक्ति:

• राष्ट्रपति द्वारा
• परामर्श:
– भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
– राज्यपाल
– संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

योग्यता:

• भारत का नागरिक
• उच्च न्यायालय में 10 वर्ष तक वकील
या
• न्यायिक पद पर 10 साल सेवा
सेवानिवृत्ति आयु: 62 वर्ष


अनुच्छेद 218 — सेवा-शर्तें और वेतन

न्यायाधीशों की सेवा-शर्तों, वेतन और भत्तों को संसद द्वारा निर्धारित किया जाता है।
इनमें बिना उचित कारण बदलाव नहीं किया जा सकता।


अनुच्छेद 219 — न्यायाधीश की शपथ

न्यायाधीश राज्यपाल के समक्ष शपथ लेते हैं।
शपथ: संविधान और कानून का पालन करना तथा न्याय करना।


अनुच्छेद 220 — सेवानिवृत्ति के बाद प्रैक्टिस पर प्रतिबंध

उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश
उसी न्यायालय में प्रैक्टिस नहीं कर सकता।
लेकिन अन्य उच्च न्यायालयों या सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर सकता है।


अनुच्छेद 221 — वेतन, भत्ते और पेंशन

संसद न्यायाधीशों की वेतन-भत्तों और पेंशन व्यवस्था तय करती है।


अनुच्छेद 222 — न्यायाधीशों का स्थानांतरण

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को
• एक उच्च न्यायालय से
• दूसरे उच्च न्यायालय में
स्थानांतरित किया जा सकता है।

स्थानांतरण राष्ट्रपति द्वारा CJI से परामर्श के बाद किया जाता है।


अनुच्छेद 223 — कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश

जब मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो,
तो वरिष्ठतम न्यायाधीश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनता है।


अनुच्छेद 224 — अतिरिक्त और कार्यकारी न्यायाधीश

जब काम का दबाव बढ़ जाए या रिक्ति हो,
तो अतिरिक्त/कार्यकारी न्यायाधीश नियुक्त किए जा सकते हैं।


अनुच्छेद 224A — सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को बुलाना

जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भी बुलाया जा सकता है।


अनुच्छेद 225 — उच्च न्यायालय की पुरानी शक्तियाँ

यह अनुच्छेद उच्च न्यायालयों की सभी "पूर्व न्यायिक शक्तियों" को बनाए रखता है (ब्रिटिश काल की विरासत)।


अनुच्छेद 226 — रिट जारी करने की शक्ति (Most Important)

उच्च न्यायालय नागरिकों के
मौलिक अधिकार + कानूनी अधिकार दोनों के लिए रिट जारी कर सकता है।

यह सुप्रीम कोर्ट (Article 32) से अधिक व्यापक अधिकार है।

रिट के प्रकार:
• हेबियस कॉर्पस
• मैंडमस
• सर्टियोरारी
• प्रोहीबिशन
• क्वो-वॉरंटो


अनुच्छेद 227 — पर्यवेक्षणीय शक्ति (Superintendence)

उच्च न्यायालय राज्य के
सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर
निगरानी, मार्गदर्शन और नियंत्रण करता है।


अनुच्छेद 228 — संवैधानिक प्रश्नों का स्थानांतरण

यदि किसी निचली अदालत में संविधान से संबंधित प्रश्न उठता है,
तो उच्च न्यायालय उस मामले को अपने पास स्थानांतरित कर सकता है।


अनुच्छेद 229 — कर्मचारियों की नियुक्ति

उच्च न्यायालय का स्टाफ
• मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त
• वेतन आदि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित


अनुच्छेद 230 — राज्यों का क्षेत्राधिकार विस्तार

संसद किसी उच्च न्यायालय का क्षेत्र बढ़ा/घटा सकती है।


अनुच्छेद 231 — सामान्य उच्च न्यायालय

एक ही उच्च न्यायालय
अनेक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए स्थापित किया जा सकता है।

उदाहरण:
• पंजाब–हरियाणा हाई कोर्ट
• गुवाहाटी हाई कोर्ट (पहले कई राज्यों के लिए था)


उच्च न्यायालय की प्रमुख शक्तियाँ और कार्य (Summary)

1) रिट जारी करना — Article 226

मौलिक व कानूनी अधिकार दोनों की सुरक्षा।

2) अपीलीय अधिकारिता

जिला अदालतों के फैसलों की अपील सुनना।

3) मूल अधिकारिता

चुनाव, विवाह, संपत्ति विवाद जैसे मामले।

4) पर्यवेक्षणीय अधिकार — Article 227

सभी अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण।

5) निचली अदालतों से संवैधानिक प्रश्नों को अपने पास बुलाना।

6) न्यायिक समीक्षा

असंवैधानिक कानूनों को अमान्य घोषित करना।


निष्कर्ष

अनुच्छेद 214 से 231 उच्च न्यायालय की संपूर्ण शक्तियों, नियुक्तियों, संरचना और अधिकारिता को विस्तार से दर्शाते हैं।
उच्च न्यायालय राज्य की न्याय व्यवस्था का मुख्य स्तंभ है और यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
यह विषय सभी प्रतियोगी परीक्षाओं—UPSC, SSC, State PSC, Judiciary Exams—में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


TOP 5 IMPORTANT FAQs

1. उच्च न्यायालय किस अनुच्छेद के तहत स्थापित है?

अनुच्छेद 214।

2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?

राष्ट्रपति (CJI, राज्यपाल और HC के CJ से परामर्श के बाद)।

3. उच्च न्यायालय रिट किस अनुच्छेद के तहत जारी करता है?

अनुच्छेद 226।

4. उच्च न्यायालय की पर्यवेक्षणीय शक्ति किस अनुच्छेद में है?

अनुच्छेद 227।

5. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु कितनी है?

62 वर्ष।



Post a Comment

Previous Post Next Post