उत्तर प्रदेश के मेरठ में बने पारंपरिक पीतल के बिगुल (Bugle) को आधिकारिक रूप से GI टैग मिल गया है।
यह वही बिगुल है जो
भारतीय सेना
पुलिस
रेजिमेंटल बैंड
परेड और देशभक्ति समारोह
में वर्षों से बजाया जाता रहा है।
यह टैग मेरठ की ऐतिहासिक शिल्पकला और सैन्य परंपरा को औपचारिक मान्यता देता है।
📍 यह उत्पाद किस क्षेत्र से जुड़ा है?
मेरठ, उत्तर प्रदेश में 19वीं शताब्दी से बिगुल निर्माण की परंपरा चली आ रही है।
हर बिगुल पूरी तरह हाथ से आकार दिया जाता है —
पीतल की शीट
हैमरिंग
फिनिशिंग
और ध्वनि संतुलन
की पारंपरिक तकनीक के साथ।
🎖️ GI टैग क्यों दिया गया?
GI यानी Geographical Indication दिया जाता है उनकी वस्तुओं को
जो किसी क्षेत्र की विशिष्टता और परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हों।
मेरठ बिगुल को GI टैग इसलिए मिला क्योंकि:
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इसका ऐतिहासिक सैन्य महत्व है
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यह हस्तनिर्मित पारंपरिक तकनीक से बनाया जाता है
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इसे बनाने की कला सिर्फ मेरठ के कारीगरों में पाई जाती है
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यह सेना और पुलिस के लिए प्रमुख संकेत उपकरण है
GI टैग मिलने के बाद बिगुल की नकल रोक दी जाएगी और असली मेरठ उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ेगी।
🎯 Govt Exam Focused Key Points
उत्पाद: मेरठ बिगुल (पीतल का वाद्य)
क्षेत्र: मेरठ, उत्तर प्रदेश
टैग प्रकार: GI (Geographical Indication)
कानून: GI Act, 1999
महत्व: भारतीय सैन्य परंपरा से जुड़ा उपकरण
उत्पादन आरंभ: 19वीं शताब्दी
📝 One-Liner Summary
मेरठ बिगुल, भारत की सैन्य ध्वनि-परंपरा का एक प्रमुख उपकरण, अब GI टैग के साथ आधिकारिक रूप से “मेरठ” की पहचान बन गया है।
❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: मेरठ बिगुल क्या है?
यह पीतल से बना पारंपरिक वाद्य यंत्र है जिसका उपयोग सेना और पुलिस परेड में होता है।
प्रश्न 2: GI टैग क्यों दिया गया?
क्योंकि यह मेरठ क्षेत्र की विशिष्ट शिल्पकला और ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा है।
प्रश्न 3: GI टैग मिलने से क्या फायदा?
कला संरक्षण, नकली उत्पादों पर रोक और कारीगरों की आय बढ़ेगी।
प्रश्न 4: किस कानून के तहत GI टैग मिलता है?
Geographical Indications of Goods Act, 1999।
प्रश्न 5: यह किस राज्य से जुड़ा है?
उत्तर प्रदेश — मेरठ।