ईस्ट इंडिया कंपनी शासन (1773–1858): परीक्षा-केंद्रित भारतीय राजव्यवस्था नोट्स

 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Part 1): कंपनी शासन (1773-1858)

Indian Polity Notes in Hindi




नमस्कार दोस्तों! 👋
आज की पोस्ट में हम पढ़ेंगे कंपनी शासन के दौरान (1773 से 1858) ब्रिटिश संसद द्वारा बनाए गए महत्वपूर्ण अधिनियम (Acts) जिनसे भारत के प्रशासन और न्याय व्यवस्था में बड़े बदलाव आये। UPSC, SSC, HSSC, CET सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में इन पर प्रश्न पूछे जाते हैं।


1. 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट

  • कंपनी के मामलों को नियंत्रित करने का पहला कदम।
  • बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बनाया गया (पहले: वॉरेन हेस्टिंग्स)।
  • गवर्नर-जनरल की 4 सदस्यीय परिषद।
  • 1774 में कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना।
  • पहले मुख्य न्यायाधीश: सर इलियाह इम्पे


2. 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट

  • भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण।
  • दोहरी सरकार प्रणाली लागू।
  • नियंत्रण बोर्ड: राजनीतिक मामले।
  • निदेशक मंडल: व्यापारिक मामले।


3. 1793 का चार्टर एक्ट

  • कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया।


4. 1813 का चार्टर एक्ट

  • भारत में ईसाई मिशनरियों को अनुमति दी गई।
  • कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त (चाय और चीन व्यापार छोड़कर)।
  • भारतीय शिक्षा पर 1 लाख रुपये वार्षिक खर्च का प्रावधान।


5. 1833 का चार्टर एक्ट

  • बंगाल के गवर्नर-जनरल → भारत के गवर्नर-जनरल (पहले: लॉर्ड विलियम बैंटिक)।
  • भारतीय विधि आयोग (1834) की स्थापना।
  • अध्यक्ष: लॉर्ड मैकॉले
  • दास प्रथा समाप्त घोषित।


6. 1853 का चार्टर एक्ट (अंतिम एक्ट)

  • सिविल सेवा परीक्षा में मेरिट आधारित चयन लागू।
  • 1854 में मैकॉले समिति की सिफारिश पर भारतीय सिविल सेवा (ICS) का गठन।

💡 Exam Booster (महत्वपूर्ण बिंदु)

  1. पहला गवर्नर-जनरल: वॉरेन हेस्टिंग्स।
  2. पहला सुप्रीम कोर्ट: कलकत्ता (1774)।
  3. पहला मुख्य न्यायाधीश: इलियाह इम्पे।
  4. कंपनी का एकाधिकार खत्म: 1813 एक्ट।
  5. दास प्रथा समाप्त: 1833 एक्ट।


निष्कर्ष

कंपनी शासन का यह काल भारत के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलावों का समय था। अगली पोस्ट में हम 1858 से 1947 तक के क्राउन रूल की चर्चा करेंगे।


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