⭐ संघीय न्यायपालिका (Federal Judiciary of India)
भारतीय संविधान ने एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और संघीय न्यायपालिका की स्थापना की है जो देश का सर्वोच्च न्यायिक तंत्र है।
यह न्यायपालिका पूरे देश में कानून और संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा करती है।
भारत की न्यायपालिका तीन स्तरों में विभाजित है:
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) – राष्ट्रीय स्तर
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उच्च न्यायालय (High Courts) – राज्य स्तर
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अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts) – जिला एवं स्थानीय स्तर
संविधान न्यायपालिका को “संविधान का संरक्षक” और “कानून का संरक्षक” कहता है।
⭐ 1. सुप्रीम कोर्ट – संघीय न्यायपालिका का शीर्ष (Articles 124–147)
सुप्रीम कोर्ट भारत की सर्वोच्च अदालत है।
अनुच्छेद 124 के तहत इसकी स्थापना की गई।
सुप्रीम कोर्ट की संरचना
• भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
• अन्य न्यायाधीश (अधिकतम संख्या संसद द्वारा निर्धारित)
न्यायाधीशों की नियुक्ति
• राष्ट्रपति द्वारा
• Collegium System के माध्यम से
• सेवानिवृत्ति आयु — 65 वर्ष
सुप्रीम कोर्ट के अधिकार (Deep Explanation)
1) मूल अधिकारिता (Original Jurisdiction – Article 131)
केंद्र और राज्यों के बीच विवाद।
2) अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction)
उच्च न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध अपील।
3) सलाहकार अधिकारिता (Advisory Jurisdiction – Article 143)
राष्ट्रपति महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकता है।
4) न्यायिक समीक्षा (Judicial Review – Articles 32, 13)
असंवैधानिक कानून रद्द कर सकता है।
5) रिट जारी करने की शक्ति (Article 32)
हेबियस कॉर्पस, मैंडमस, सर्टियोरारी, प्रोहीबिशन, क्वो-वॉरंटो।
सुप्रीम कोर्ट की विशेषताएँ
• पूरे भारत में कानून की अंतिम व्याख्या करता है
• मानवाधिकारों का रक्षक
• संसद/राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए कानूनों की वैधता की जांच
⭐ 2. उच्च न्यायालय – राज्यीय स्तर की सर्वोच्च अदालत (Articles 214–231)
उच्च न्यायालय राज्य स्तर की सर्वोच्च अदालत है।
नियुक्ति
• न्यायाधीश राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त
• शपथ — राज्यपाल द्वारा
• सेवानिवृत्ति आयु — 62 वर्ष
अधिकारिता (Deep Explanation)
1) अपीलीय अधिकारिता
जिला अदालतों के फैसलों के विरुद्ध अपील।
2) मूल अधिकारिता
कुछ मामलों में सीधे सुनवाई (जैसे चुनाव संबंधी मामले)।
3) रिट अधिकारिता (Article 226)
मौलिक अधिकार + कानूनी अधिकार, दोनों के लिए रिट जारी कर सकता है।
4) पर्यवेक्षणीय अधिकारिता (Article 227)
राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों की निगरानी।
महत्वपूर्ण तथ्य
• एक उच्च न्यायालय एक से अधिक राज्यों के लिए भी हो सकता है (उदा: पंजाब-हरियाणा HC)।
• उच्च न्यायालय के निर्णय राज्य में बाध्यकारी होते हैं।
⭐ 3. अधीनस्थ न्यायालय – जिला एवं स्थानीय स्तर (Articles 233–237)
ये न्यायालय आम जनता के लिए सबसे निकट का न्यायिक मंच हैं।
अधीनस्थ न्यायालयों के प्रकार
• जिला एवं सत्र न्यायालय
• मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
• सिविल जज
• पारिवारिक न्यायालय
• उप-न्यायालय
नियुक्ति शक्ति
• जिला न्यायाधीश — राज्यपाल की नियुक्ति उच्च न्यायालय की सलाह पर
• अन्य न्यायाधीश — राज्य सरकार + उच्च न्यायालय संयुक्त रूप से
भूमिकाएँ
• आपराधिक और दीवानी मामलों की सुनवाई
• अपीलों का निपटारा
• परिवारिक, जमीनी और संपत्ति विवादों का समाधान
⭐ संघीय न्यायपालिका की प्रमुख विशेषताएँ
1) स्वतंत्र न्यायपालिका
नियुक्ति, वेतन, कार्यकाल — केंद्र सरकार से स्वतंत्र।
2) एकीकृत न्यायिक व्यवस्था
पूरे देश में एक ही प्रकार की न्यायपालिका लागू।
3) न्यायिक समीक्षा
न्यायपालिका संसद और राज्य विधायिकाओं के कानूनों की समीक्षा कर सकती है।
4) संविधान का संरक्षक
मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
5) एकीकृत अपीलीय प्रणाली
जिला अदालत → उच्च न्यायालय → सुप्रीम कोर्ट
⭐ संघीय न्यायपालिका क्यों आवश्यक है? (Exam Point)
• देशभर में एक समान न्याय सुनिश्चित करने के लिए
• केंद्र और राज्य के विवादों को निष्पक्ष रूप से हल करने के लिए
• संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने के लिए
• सरकार की शक्ति पर नियंत्रण रखने के लिए (Checks & Balances)
• नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए
⭐ TOP 5 IMPORTANT FAQs
1. भारत की संघीय न्यायपालिका के कितने स्तर हैं?
तीन — सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालय, अधीनस्थ न्यायालय।
2. सुप्रीम कोर्ट किस अनुच्छेद के तहत स्थापित है?
अनुच्छेद 124।
3. उच्च न्यायालय के पास रिट जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में है?
अनुच्छेद 226।
4. अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण किसके पास होता है?
उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 235)।
5. न्यायिक समीक्षा का अर्थ क्या है?
न्यायपालिका द्वारा असंवैधानिक कानूनों को रद्द करने की शक्ति।