अनुच्छेद 153 से 237 की पूरी व्याख्या | राज्य सरकार, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय

अनुच्छेद 153 से 237 — विस्तृत व्याख्या

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से 237 राज्य सरकार की संरचना,
राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, राज्य विधायिका,
उच्च न्यायालय, और अधीनस्थ न्यायालय से जुड़े प्रावधानों को परिभाषित करते हैं।

यह भाग भारत के संघवाद, प्रशासन और न्यायालय प्रणाली को मजबूत बनाता है।

नीचे इन सभी अनुच्छेदों को सरल, गहराई से और वेबसाइट-योग्य शैली में समझाया गया है।


(भाग 1) राज्यपाल — Articles 153 to 162

अनुच्छेद 153

प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होगा।
एक व्यक्ति एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल बन सकता है।

अनुच्छेद 154

राज्य की सभी कार्यकारी शक्तियाँ राज्यपाल में निहित होंगी।

अनुच्छेद 155

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।

अनुच्छेद 156

कार्यकाल 5 वर्ष — लेकिन राष्ट्रपति कभी भी पद से हटाने में स्वतंत्र है।

अनुच्छेद 157

राज्यपाल बनने की योग्यता —
भारत का नागरिक, आयु 35 वर्ष।

अनुच्छेद 158

राज्यपाल का पद—किसी लाभ के पद पर नहीं रह सकता।

अनुच्छेद 159

राज्यपाल की शपथ।

अनुच्छेद 160

विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति राज्यपाल के कार्य तय कर सकता है।

अनुच्छेद 161

राज्यपाल की दंड-माफी संबंधी शक्तियाँ
(मृत्यु दंड माफी की शक्ति राज्यपाल के पास नहीं, सिर्फ राष्ट्रपति के पास होती है)

अनुच्छेद 162

राज्य की कार्यपालिका का क्षेत्र और सीमा।


(भाग 2) मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद — Articles 163–167

अनुच्छेद 163

राज्यपाल की सहायता और सलाह के लिए मंत्रिपरिषद होगी।
वास्तविक शक्ति मंत्रिपरिषद के पास होती है।

अनुच्छेद 164

• मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है
• अन्य मंत्री मुख्यमंत्री की सलाह पर नियुक्त
• मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी

अनुच्छेद 165

एडवोकेट जनरल
राज्य का सर्वोच्च विधिक अधिकारी।

अनुच्छेद 166

राज्य के कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाएंगे।

अनुच्छेद 167

मुख्यमंत्री के कर्तव्य—
राज्यपाल को जानकारी देना, निर्णय समझाना, सुझाव देना।


(भाग 3) राज्य विधायिका — Articles 168–212

यह भाग राज्य स्तर पर कानून बनाने वाली संस्था को परिभाषित करता है।

अनुच्छेद 168

राज्य विधायिका
• एकसदनीय (केवल विधानसभा)
• द्विसदनीय (विधानसभा + विधान परिषद)

अनुच्छेद 169

विशेष प्रक्रिया द्वारा विधान परिषद की स्थापना या समाप्ति।

अनुच्छेद 170

विधानसभा की संरचना।

अनुच्छेद 171

विधान परिषद की संरचना —
MLC विभिन्न समूहों द्वारा चुने जाते हैं।

अनुच्छेद 172

विधानसभा का कार्यकाल — 5 वर्ष।

अनुच्छेद 173

विधानसभा सदस्य बनने की योग्यता।

अनुच्छेद 174

संसदीय सत्र राज्यपाल द्वारा बुलाए और स्थगित किए जाते हैं।

अनुच्छेद 175

राज्यपाल का अभिभाषण।

अनुच्छेद 176

विधानसभा का प्रथम सत्र — राज्यपाल का संबोधन।

अनुच्छेद 177

सदन में राज्यपाल का अधिकार।

अनुच्छेद 178–181

विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।

अनुच्छेद 182–185

विधान परिषद अध्यक्ष/उपाध्यक्ष।

अनुच्छेद 187

विधानसभा के लिए अलग-अलग सचिवालय।

अनुच्छेद 191

सदस्यता की अयोग्यता।

अनुच्छेद 196–200

विधेयकों की प्रक्रिया और राज्यपाल की स्वीकृति।

अनुच्छेद 213

राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति।


(भाग 4) उच्च न्यायालय — Articles 214–231

अनुच्छेद 214

प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा।

अनुच्छेद 215

उच्च न्यायालय — न्यायालय की अवमानना के लिए दंडित कर सकता है।

अनुच्छेद 216

उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

अनुच्छेद 217

न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
योग्यता — वकील, न्यायिक अधिकारी।

अनुच्छेद 218

न्यायाधीशों की शर्तें।

अनुच्छेद 219

न्यायाधीश की शपथ।

अनुच्छेद 220

न्यायाधीश से सेवानिवृत्ति के बाद प्रैक्टिस पर प्रतिबंध।

अनुच्छेद 226

उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति
(सुप्रीम कोर्ट के समान)

अनुच्छेद 227

न्यायिक पर्यवेक्षण की शक्ति।


(भाग 5) अधीनस्थ न्यायालय — Articles 233–237

ये अनुच्छेद राज्य के जिला न्यायालयों, सिविल जजों और न्यायिक अधिकारियों को नियंत्रित करते हैं।

अनुच्छेद 233

जिला न्यायाधीश की नियुक्ति।

अनुच्छेद 234

अन्य न्यायिक पदों की नियुक्ति।

अनुच्छेद 235

अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण उच्च न्यायालय के पास।

अनुच्छेद 236–237

अन्य प्रशासनिक, संरचनात्मक और न्यायिक प्रावधान।


TOP 5 IMPORTANT FAQs

1. अनुच्छेद 153 किससे संबंधित है?

राज्यपाल की नियुक्ति — प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होगा।

2. राज्य का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख कौन होता है?

मुख्यमंत्री।

3. राज्यपाल अध्यादेश किस अनुच्छेद के तहत जारी करता है?

अनुच्छेद 213।

4. उच्च न्यायालय की रिट शक्ति किस अनुच्छेद में है?

अनुच्छेद 226।

5. अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण किसके पास होता है?

उच्च न्यायालय के पास (अनुच्छेद 235)।



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