⭐ मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12–35)
भारत के संविधान ने नागरिकों को कुछ मूलभूत अधिकार प्रदान किए हैं जिन्हें मौलिक अधिकार कहा जाता है। ये अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव हैं और प्रत्येक नागरिक की स्वतंत्रता, समानता तथा गरिमा की रक्षा करते हैं।
मौलिक अधिकार अनुच्छेद 12 से 35 तक विस्तारित हैं और इन्हें संविधान का “मिनी संविधान” भी कहा जाता है।
1. समानता का अधिकार (Right to Equality)
अनुच्छेद 14 से 18
यह अधिकार भारतीय लोकतंत्र का आधार है। इसके अंतर्गत:
अनुच्छेद 14 — कानून के समक्ष समानता
अनुच्छेद 15 — धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध
अनुच्छेद 16 — सरकारी नौकरियों में समान अवसर
अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का अंत
अनुच्छेद 18 — उपाधियों का उन्मूलन
इनका उद्देश्य समाज में समानता स्थापित करना है।
2. स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom)
अनुच्छेद 19 से 22
यह अधिकार नागरिकों को स्वतंत्र जीवन जीने की गारंटी देता है।
अनुच्छेद 19 — बोले, लिखे, संगठन बनाए, शांतिपूर्वक एकत्र हों, आवागमन, व्यापार/पेशा अपनाने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 20 — अपराध के मामलों में सुरक्षा
अनुच्छेद 21 — जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 21A — शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद 22 — गिरफ्तारी व नजरबंदी के विरुद्ध संरक्षण
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right Against Exploitation)
अनुच्छेद 23–24
अनुच्छेद 23 — मानव तस्करी, जबरन मजदूरी का निषेध
अनुच्छेद 24 — 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कारखानों/खदानों में काम कराना प्रतिबंधित
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion)
अनुच्छेद 25–28
अनुच्छेद 25 — धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार का अधिकार
अनुच्छेद 26 — धार्मिक संस्थानों को प्रबंधित करने का अधिकार
अनुच्छेद 27 — धार्मिक करों से मुक्ति
अनुच्छेद 28 — शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर प्रावधान
5. सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार (Cultural & Educational Rights)
अनुच्छेद 29–30
अनुच्छेद 29 — अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति की रक्षा
अनुच्छेद 30 — अल्पसंख्यक संस्थानों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार
6. संवैधानिक उपचार का अधिकार (Right to Constitutional Remedies)
अनुच्छेद 32
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसे संविधान का “हृदय और आत्मा” कहा है।
यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट पाँच प्रकार की रिटें जारी कर सकता है:
हेबियस कॉर्पस, मैंडमस, क्वो-वॉरंटो, सर्टियोरारी, प्रोहीबिशन
⭐ मौलिक अधिकारों की प्रमुख विशेषताएँ
मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं।
इनका उल्लंघन होने पर नागरिक रिट दायर कर सकता है।
ये अधिकार केवल उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं।
राष्ट्रपति आपातकाल के दौरान कुछ अधिकार निलंबित कर सकते हैं।
⭐ 5 IMPORTANT FAQs
1. भारत में मौलिक अधिकार कितने हैं?
भारतीय संविधान में 6 मौलिक अधिकार हैं।
2. मौलिक अधिकार किस अनुच्छेद से किस अनुच्छेद तक हैं?
अनुच्छेद 12 से 35 तक।
3. कौन सा अधिकार संविधान का “हृदय और आत्मा” कहलाता है?
अनुच्छेद 32 — संवैधानिक उपचार का अधिकार।
4. अस्पृश्यता का उन्मूलन किस अनुच्छेद में है?
अनुच्छेद 17 में।
5. शिक्षा का अधिकार किस अनुच्छेद में जोड़ा गया?
अनुच्छेद 21A — 86वें संशोधन, 2002 द्वारा।