सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गवर्नर और राष्ट्रपति के लिए बिल स्वीकृति की समय-सीमा

 


1. सुप्रीम कोर्ट का मुख्य फैसला

  • गवर्नर और राष्ट्रपति को बिल पर स्वीकृति देने के लिए समय-सीमा तय नहीं की जा सकती।

  • कोर्ट किसी भी संवैधानिक पद के लिए “फिक्स्ड टाइमलाइन” निर्धारित नहीं कर सकता।


2. गवर्नर के पास बिल आने पर 3 विकल्प

  1. स्वीकृति देना (Assent)

  2. पुनर्विचार हेतु विधायिका को लौटाना (Return for Reconsideration)

  3. राष्ट्रपति के पास भेजना (Reserve for President)


3. “Deemed Assent” मान्य नहीं

  • बिल लंबा पेंडिंग रहने पर “स्वतः स्वीकृति’’ (deemed assent) माना जाएगा—यह अवधारणा सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार की


4. ‘अनुचित विलम्ब’ पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

  • गवर्नर या राष्ट्रपति अनिश्चितकाल तक बिल लंबित नहीं रख सकते

  • लेकिन कोर्ट यह नहीं बताएगी कि निर्णय कितने दिनों में करना है।


5. संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

  • अनुच्छेद 200 – राज्य के गवर्नर की बिल स्वीकृति से संबंधित शक्तियाँ

  • अनुच्छेद 201 – राष्ट्रपति की भूमिका (जब बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाए)


6. यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?

  • राज्य व केंद्र के बीच संवैधानिक संतुलन (Federal Balance) सुनिश्चित करता है।

  • गवर्नर की स्वीकृति प्रक्रिया को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाता है।

  • परीक्षा में Polity के अंतर्गत Governor–Legislature विवाद के नए उदाहरण के रूप में पूछा जा सकता है।



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