⭐ 1. सुप्रीम कोर्ट का मुख्य फैसला
-
गवर्नर और राष्ट्रपति को बिल पर स्वीकृति देने के लिए समय-सीमा तय नहीं की जा सकती।
-
कोर्ट किसी भी संवैधानिक पद के लिए “फिक्स्ड टाइमलाइन” निर्धारित नहीं कर सकता।
⭐ 2. गवर्नर के पास बिल आने पर 3 विकल्प
-
स्वीकृति देना (Assent)
-
पुनर्विचार हेतु विधायिका को लौटाना (Return for Reconsideration)
-
राष्ट्रपति के पास भेजना (Reserve for President)
⭐ 3. “Deemed Assent” मान्य नहीं
-
बिल लंबा पेंडिंग रहने पर “स्वतः स्वीकृति’’ (deemed assent) माना जाएगा—यह अवधारणा सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार की।
⭐ 4. ‘अनुचित विलम्ब’ पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
-
गवर्नर या राष्ट्रपति अनिश्चितकाल तक बिल लंबित नहीं रख सकते।
-
लेकिन कोर्ट यह नहीं बताएगी कि निर्णय कितने दिनों में करना है।
⭐ 5. संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद
-
अनुच्छेद 200 – राज्य के गवर्नर की बिल स्वीकृति से संबंधित शक्तियाँ
-
अनुच्छेद 201 – राष्ट्रपति की भूमिका (जब बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाए)
⭐ 6. यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?
-
राज्य व केंद्र के बीच संवैधानिक संतुलन (Federal Balance) सुनिश्चित करता है।
-
गवर्नर की स्वीकृति प्रक्रिया को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाता है।
-
परीक्षा में Polity के अंतर्गत Governor–Legislature विवाद के नए उदाहरण के रूप में पूछा जा सकता है।