राज्य सरकार की संरचना | राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रीपरिषद, उच्च न्यायालय | भारतीय संविधान की विस्तृत व्याख्या

 

राज्य सरकार की संरचना (State Government Structure)

भारतीय संविधान के अनुसार भारत एक संघीय व्यवस्था (Federal System) वाला देश है।
केंद्र के साथ–साथ राज्यों की अपनी अलग सरकार और शक्तियाँ होती हैं।
राज्य सरकार मुख्यतः पाँच भागों में बंटी होती है:

  1. राज्यपाल (Governor)

  2. मुख्यमंत्री (Chief Minister)

  3. मंत्री-परिषद (Council of Ministers)

  4. राज्य विधायिका (State Legislature)

  5. उच्च न्यायालय (High Court)

यह संरचना अनुच्छेद 153 से 237 तक फैली हुई है।

नीचे इन सभी को विस्तार से और आसान भाषा में समझते हैं।


1. राज्यपाल (Governor)

अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होगा।
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।

राज्यपाल की नियुक्ति

• नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा
• कार्यकाल 5 वर्ष
• पद से हटाना राष्ट्रपति के विवेक पर

राज्यपाल की शक्तियाँ (विस्तृत)

1) कार्यकारी शक्तियाँ

• मुख्यमंत्री की नियुक्ति
• मंत्रिपरिषद की नियुक्ति
• प्रशासनिक निर्णयों की देखरेख
• राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति (Chancellor)

2) विधायी शक्तियाँ

• विधानसभा/परिषद को बुलाना, स्थगित करना
• विधेयक को मंजूरी देना
• किसी विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजना
• अध्यादेश जारी करना (Article 213)

3) न्यायिक शक्तियाँ

• दंड माफी, दंड मुक्ति, दंड स्थगन (कुछ अपराधों में सीमित)


2. मुख्यमंत्री (Chief Minister)

मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है।
केंद्र में प्रधानमंत्री की तरह, राज्य में मुख्यमंत्री सबसे शक्तिशाली पद है।

मुख्यमंत्री की नियुक्ति

• राज्यपाल द्वारा नियुक्त
• विधानसभा में बहुमत दल का नेता

मुख्यमंत्री की भूमिकाएँ (Deep Explanation)

• राज्य की नीतियाँ बनाता है
• मंत्रिपरिषद का नेतृत्व
• प्रशासनिक कार्यों की निगरानी
• राज्यपाल को सलाह
• केंद्र–राज्य संबंधों का समन्वय
• विधानसभा में सरकार का नेतृत्व


3. मंत्रिपरिषद (Council of Ministers)

अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल की सहायता के लिए मंत्रिपरिषद होती है और इसका नेतृत्व मुख्यमंत्री करते हैं।

मंत्रियों के प्रकार

• कैबिनेट मंत्री
• राज्य मंत्री
• उपमंत्री

मुख्य कार्य

• शासन संचालन
• नीतियाँ लागू करना
• विधानसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व


4. राज्य विधायिका (State Legislature)

भारत में दो तरह की राज्य विधायिकाएँ होती हैं:

1) एकसदनीय (Unicameral)

केवल विधानसभा (Vidhan Sabha)
— भारत के अधिकांश राज्य ऐसे ही हैं।

2) द्विसदनीय (Bicameral)

विधानसभा + विधान परिषद
— उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना

विधान सभा (Vidhan Sabha)

• जनता द्वारा चुना गया सदन
• कार्यकाल — 5 वर्ष
• सरकार इसके प्रति उत्तरदायी

विधान परिषद (Vidhan Parishad)

• स्थायी सदन
• कुल सदस्यों का 1/3 हर 2 वर्ष में सेवानिवृत्त
• सदस्य विभिन्न निर्वाचन निकायों से चुने जाते हैं


5. उच्च न्यायालय (High Court)

अनुच्छेद 214–231 के अनुसार प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय होगा।

उच्च न्यायालय की शक्तियाँ

• न्यायिक समीक्षा
• केंद्र/राज्य/स्थानीय निकाय मामलों की सुनवाई
• मूल, अपीलीय और पर्यवेक्षणीय न्यायिक अधिकार

मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।


राज्य सरकार की अन्य महत्वपूर्ण संस्थाएँ

लोक सेवा आयोग (State PSC – Article 315)

• राज्य स्तर की भर्ती
• सलाहकार संस्था

महालेखा परीक्षक को राज्य की रिपोर्टें भेजना

• CAG की रिपोर्ट राज्यपाल के माध्यम से विधानसभा में पेश होती है

राज्य सूचना आयोग

• सूचना के अधिकार की व्यवस्था


केंद्र–राज्य संबंध (संक्षेप में)

प्रशासनिक संबंध

केंद्र और राज्य मिलकर नीतियाँ बनाते हैं।

वित्तीय संबंध

वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच धन का बँटवारा तय करता है।

विधायी संबंध

तीन सूचियाँ — संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची
राज्य सरकार राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाती है।


5 IMPORTANT FAQs

1. राज्य का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख कौन होता है?

मुख्यमंत्री।

2. राज्यपाल किसके द्वारा नियुक्त होता है?

राष्ट्रपति द्वारा।

3. राज्य विधानसभा का कार्यकाल कितना होता है?

पाँच वर्ष।

4. कौन से राज्यों में द्विसदनीय विधायिका है?

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना।

5. राज्य में अध्यादेश जारी करने की शक्ति किसके पास है?

राज्यपाल (अनुच्छेद 213)।



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