अंबाला जिले की प्रमुख नदियाँ एवं जल निकासी व्यवस्था
अंबाला जिले की नदियाँ एवं जल निकासी व्यवस्था हरियाणा सामान्य ज्ञान का महत्वपूर्ण विषय है। अंबाला की भौगोलिक स्थिति शिवालिक क्षेत्र के निकट होने के कारण यहाँ कई मौसमी नदियाँ और जलधाराएँ पाई जाती हैं। जिले की जल निकासी व्यवस्था मुख्य रूप से मारकंडा, डंगरी/टांगरी और घग्गर तथा उनकी सहायक धाराओं पर आधारित है।
अंबाला जिला प्रशासन के अनुसार जिले की जल निकासी व्यवस्था मुख्यतः गैर-बारहमासी (Non-perennial) धाराओं से बनी है। मारकंडा और डंगरी अंततः जिले की सीमा के बाहर घग्गर नदी में मिलती हैं, जबकि घग्गर और उसकी सहायक धाराएँ एक अंतर्देशीय जल निकासी प्रणाली बनाती हैं।
अंबाला की प्रमुख जल निकासी प्रणालियाँ — मारकंडा, डंगरी/टांगरी और घग्गर।
मारकंडा + डंगरी → अंततः घग्गर में मिलती हैं।
घग्गर → अंतर्देशीय जल निकासी प्रणाली का हिस्सा।
1. अंबाला की प्रमुख नदियाँ
अंबाला जिले की प्रमुख नदियों/जलधाराओं को तीन मुख्य जल निकासी प्रणालियों में बाँटा जा सकता है:
- मारकंडा एवं उसकी सहायक धाराएँ
- डंगरी (टांगरी) एवं उसकी सहायक धाराएँ
- घग्गर एवं उसकी सहायक धाराएँ
इनमें से अधिकांश धाराएँ मौसमी प्रकृति की हैं और वर्षा ऋतु में इनमें जल प्रवाह काफी बढ़ जाता है।
2. मारकंडा नदी
मारकंडा नदी अंबाला जिले की प्रमुख नदियों में से एक है। इसका उद्गम हिमाचल प्रदेश की धर्ती धार श्रेणी की दक्षिणी ढलानों से माना जाता है। इसके बाद यह शिवालिक पर्वत श्रेणी को काटते हुए मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है और अंबाला जिले से होकर गुजरती है।
अंबाला जिला प्रशासन के अनुसार कालाअंब से मुलाना के बीच मारकंडा का नदी-चैनल अपेक्षाकृत चौड़ा है, जबकि मुलाना के दक्षिण में इसका चैनल संकरा हो जाता है।
वर्षा ऋतु में मारकंडा
वर्षा ऋतु के दौरान मारकंडा नदी में पानी की मात्रा काफी बढ़ जाती है। अत्यधिक वर्षा के समय नदी में तेज प्रवाह के कारण इसके निचले हिस्सों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मारकंडा → धर्ती धार की दक्षिणी ढलान → शिवालिक → अंबाला का मैदानी क्षेत्र
3. डंगरी या टांगरी नदी
डंगरी (Dangri) या टांगरी अंबाला जिले की दूसरी प्रमुख जल निकासी धारा है। इसका उद्गम मोरनी पहाड़ियों से होता है। यह दक्षिण दिशा में बहते हुए अंबाला जिले के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरती है।
डंगरी धारा आगे चलकर चज्जू माजरा गाँव के पास बालियाली नदी से मिलती है। इसके बाद यह दक्षिण दिशा में बहती हुई अंबाला छावनी के पूर्वी भाग से गुजरती है।
डंगरी का आगे का प्रवाह
अंबाला छावनी के बाद डंगरी धारा दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुड़ती है। सेगटा और सेगती गाँवों के पास ओमला और अमरी धाराएँ इसमें मिलती हैं। इसके बाद डंगरी आगे पश्चिम दिशा में बहती है और निहर्सी गाँव के पास दक्षिण दिशा में मुड़कर जिले से बाहर निकलती है तथा पंजाब के पटियाला जिले की ओर चली जाती है।
4. डंगरी नदी की सहायक धाराएँ
डंगरी/टांगरी की जल निकासी प्रणाली में कई छोटी धाराएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- बालियाली नदी
- अमरी
- ओमला
बालियाली नदी
बालियाली नदी मोरनी पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों से निकलती है और चज्जू माजरा गाँव के पास डंगरी नदी में मिलती है।
अमरी नदी
अमरी को शहजादपुर वाली या दादरी के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्यतः वर्षा ऋतु में मैदानी क्षेत्र में एकत्र होने वाले पानी से बनती है। यह रतौर के पास से शुरू होकर दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है और ओमला की धारा को अपने साथ लेकर सेगटा-सेगती के बीच डंगरी में मिलती है।
5. घग्गर नदी
घग्गर नदी अंबाला जिले की तीसरी प्रमुख नदी प्रणाली है। घग्गर का उद्गम हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बताया गया है। यह अंबाला जिले के उत्तर-पश्चिमी भाग में कुछ दूरी तक प्रवाहित होती है।
घग्गर अंबाला शहर के पास से बहुत कम दूरी तक जिले में बहती है और इसके बाद जिले की सीमा के बाहर लगभग समानांतर दिशा में आगे बढ़ती है।
घग्गर की मौसमी प्रकृति
घग्गर के ऊपरी प्रवाह में वर्ष के अधिकांश समय कुछ मात्रा में पानी रह सकता है, लेकिन निचले प्रवाह में गर्मियों के दौरान नदी सामान्यतः सूखी रहती है। वर्षा ऋतु में इसमें पानी का प्रवाह काफी बढ़ जाता है।
घग्गर → उद्गम: सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
गर्मियों में → निचले भाग में सामान्यतः सूखी
वर्षा ऋतु → जल प्रवाह बढ़ जाता है
6. अंबाला की नदियों का आपसी संबंध
अंबाला की तीन प्रमुख जल निकासी प्रणालियों को समझने के लिए उनका आपसी संबंध महत्वपूर्ण है। मारकंडा और डंगरी अंततः जिले की सीमा के बाहर घग्गर नदी में मिलती हैं। घग्गर और उसकी सहायक धाराएँ मिलकर एक अंतर्देशीय जल निकासी प्रणाली का निर्माण करती हैं।
| नदी/धारा | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| मारकंडा | धर्ती धार की दक्षिणी ढलानों से निकलती है; शिवालिक को पार करके अंबाला में प्रवेश करती है |
| डंगरी/टांगरी | मोरनी पहाड़ियों से निकलती है; अंबाला छावनी के पूर्व से होकर बहती है |
| घग्गर | सिरमौर से निकलती है; अंबाला के उत्तर-पश्चिमी भाग से होकर गुजरती है |
7. अंबाला में बाढ़ की समस्या
अंबाला की कई नदियाँ और धाराएँ गैर-बारहमासी हैं। सामान्य मौसम में इनमें जल प्रवाह सीमित रहता है, लेकिन मानसून के दौरान भारी वर्षा होने पर पानी की मात्रा अचानक बढ़ सकती है।
विशेष रूप से मारकंडा में वर्षा ऋतु के दौरान अत्यधिक जल प्रवाह होने पर निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने का उल्लेख जिला प्रशासन ने किया है।
इसलिए अंबाला की जल निकासी व्यवस्था को समझने के लिए मानसून और शिवालिक क्षेत्र दोनों का महत्व है।
8. शिवालिक क्षेत्र का नदियों पर प्रभाव
अंबाला के उत्तर और उत्तर-पूर्व में शिवालिक क्षेत्र स्थित है। शिवालिक की ढलानों से निकलने वाली अनेक मौसमी धाराएँ मैदानी क्षेत्र की ओर आती हैं। इसी कारण अंबाला की जल निकासी प्रणाली में पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों का प्रभाव दिखाई देता है।
मारकंडा और डंगरी के उद्गम क्षेत्रों को देखें तो दोनों का संबंध हिमालय की शिवालिक/मोरनी क्षेत्रीय भू-आकृति से है।
9. अंबाला में जल संसाधनों की स्थिति
अंबाला में बड़ी संख्या में जल निकासी धाराएँ होने के बावजूद जिला प्रशासन के अनुसार क्षेत्र में जल संसाधनों की पर्याप्तता की समस्या बनी रहती है। नहर सिंचाई जिले के केवल कुछ छोटे क्षेत्रों तक सीमित है। जिले के बड़े हिस्से की स्थलाकृति के कारण नहर सिंचाई के विस्तार की संभावनाएँ सीमित बताई गई हैं।
इस कारण कुएँ और ट्यूबवेल जिले में सिंचाई के प्रमुख स्रोत बने हुए हैं।
10. अंबाला की जल निकासी व्यवस्था – एक नजर में
🌊 मुख्य जल निकासी प्रणाली:
1️⃣ मारकंडा + सहायक धाराएँ
2️⃣ डंगरी/टांगरी + सहायक धाराएँ
3️⃣ घग्गर + सहायक धाराएँ
➡️ मारकंडा और डंगरी: अंततः घग्गर में मिलती हैं।
➡️ घग्गर: अंतर्देशीय जल निकासी प्रणाली का हिस्सा है।
➡️ प्रमुख सहायक धाराएँ: बालियाली, अमरी और ओमला।
11. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- अंबाला की जल निकासी व्यवस्था मुख्यतः गैर-बारहमासी धाराओं पर आधारित है।
- अंबाला की तीन प्रमुख जल निकासी प्रणालियाँ मारकंडा, डंगरी और घग्गर हैं।
- मारकंडा का संबंध धर्ती धार श्रेणी, हिमाचल प्रदेश से है।
- मारकंडा शिवालिक पर्वत श्रेणी को काटकर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है।
- मारकंडा में वर्षा ऋतु में जल की मात्रा बहुत बढ़ जाती है।
- मारकंडा के निचले प्रवाह में बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
- डंगरी/टांगरी नदी का उद्गम मोरनी पहाड़ियों से होता है।
- बालियाली नदी चज्जू माजरा के पास डंगरी में मिलती है।
- अमरी को शहजादपुर वाली या दादरी भी कहा जाता है।
- घग्गर नदी का उद्गम सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में बताया गया है।
- घग्गर अंबाला के उत्तर-पश्चिमी भाग से होकर गुजरती है।
- गर्मियों में घग्गर के निचले प्रवाह में पानी सामान्यतः कम या समाप्त हो जाता है।
- वर्षा ऋतु में घग्गर में जल प्रवाह बढ़ जाता है।
- मारकंडा और डंगरी अंततः जिले के बाहर घग्गर में मिलती हैं।
- कुएँ और ट्यूबवेल अंबाला में सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं।
12. HSSC/CET के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1: अंबाला जिले की प्रमुख जल निकासी प्रणालियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर: मारकंडा, डंगरी/टांगरी और घग्गर।
प्रश्न 2: मारकंडा नदी का उद्गम कहाँ से होता है?
उत्तर: हिमाचल प्रदेश की धर्ती धार श्रेणी की दक्षिणी ढलानों से।
प्रश्न 3: डंगरी नदी का उद्गम कहाँ से होता है?
उत्तर: मोरनी पहाड़ियों से।
प्रश्न 4: घग्गर नदी का उद्गम कहाँ बताया गया है?
उत्तर: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में।
प्रश्न 5: मारकंडा और डंगरी अंततः किस नदी में मिलती हैं?
उत्तर: घग्गर नदी में।
प्रश्न 6: अंबाला की नदियाँ मुख्यतः किस प्रकार की हैं?
उत्तर: गैर-बारहमासी या मौसमी।
प्रश्न 7: डंगरी की सहायक धाराओं में कौन-कौन सी प्रमुख हैं?
उत्तर: बालियाली, अमरी और ओमला।
प्रश्न 8: अमरी धारा को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: शहजादपुर वाली या दादरी।
प्रश्न 9: अंबाला में सिंचाई के प्रमुख स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर: कुएँ और ट्यूबवेल।
प्रश्न 10: किस नदी में वर्षा ऋतु के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है?
उत्तर: मारकंडा नदी।
13. Quick Revision
मारकंडा → धर्ती धार → शिवालिक → अंबाला
डंगरी/टांगरी → मोरनी पहाड़ियाँ → अंबाला क्षेत्र
घग्गर → सिरमौर → अंबाला का उत्तर-पश्चिमी भाग
मुख्य प्रणालियाँ → मारकंडा + डंगरी + घग्गर
मारकंडा + डंगरी → अंततः घग्गर
मुख्य सहायक धाराएँ → बालियाली + अमरी + ओमला
प्रमुख सिंचाई स्रोत → कुएँ + ट्यूबवेल
14. निष्कर्ष
अंबाला जिले की जल निकासी व्यवस्था उसकी भौगोलिक स्थिति और शिवालिक क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हुई है। जिले की प्रमुख जल निकासी प्रणालियाँ मारकंडा, डंगरी/टांगरी और घग्गर हैं। इनमें से मारकंडा और डंगरी अंततः घग्गर से जुड़ती हैं।
मानसून के दौरान इन मौसमी धाराओं में जल प्रवाह तेजी से बढ़ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। दूसरी ओर, जिले में जल संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता की समस्या के कारण सिंचाई के लिए कुएँ और ट्यूबवेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मारकंडा — धर्ती धार
डंगरी — मोरनी पहाड़ियाँ
घग्गर — सिरमौर
मारकंडा + डंगरी — घग्गर से जुड़ती हैं
स्रोत: जिला अंबाला, हरियाणा सरकार — River System & Water Resources.
स्रोत: जिला अंबाला, हरियाणा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट।
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